नलखेड़ा की पावन भूमि से जुड़े पंडित गौतम शर्माजी का आध्यात्मिक जीवन श्रद्धा, साधना और सेवा का प्रतीक है।
बगलामुखी हवन बगलामुखी ३६००० जाप , बगलामुखी मिर्ची हवन , सर्व कार्य सिद्धी , शत्रु बाधा निवारण, तंत्र बाधा निवारण , कोर्ट केस विजय प्राप्ति , लक्ष्मी प्राप्ति , बगलामुखी उच्चाटन प्रयोग , नजर दोष, बगलामुखी शास्त्रार्चन, कर्ज मुक्ति, बगलामुखी सवा लाख जाप अनुष्ठान मुख्य रूप से किये जाते हैं |
नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और सिद्ध शक्तिपीठ है, जिसकी स्थापना महाभारत काल में युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण के निर्देश पर की थी। यह मंदिर लखूंदर नदी के तट पर स्थित है और यहाँ माँ बगलामुखी की स्वयंभू प्रतिमा विराजमान है। अपनी दिव्य शक्ति के कारण, यह मंदिर विशेष रूप से राजनीतिक विजय और शत्रुओं पर सफलता पाने के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में लखुंदर नदी के तट पर स्थित **माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा** एक अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी तांत्रिक स्थल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना महाभारत काल में भगवान कृष्ण के निर्देश पर **महाराज युधिष्ठिर** ने युद्ध में विजय प्राप्त करने हेतु की थी। यह मंदिर पूरे विश्व में इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ माँ बगलामुखी की स्वयंभू प्रतिमा विराजित है, जिन्हें 'शत्रु नाशिनी' माना जाता है; यही कारण है कि यहाँ राजनेता, न्याय विभाग से जुड़े लोग और बड़े-बड़े दिग्गज अपने शत्रुओं पर विजय, मुकदमों में जीत और बाधाओं की शांति के लिए विशेष **अनुष्ठान और पीली सरसों का हवन** करवाने आते हैं। यहाँ मुख्य रूप से **तांत्रिक पूजन, शत्रु बाधा निवारण हवन और बगलामुखी मंत्रों का जाप** होता है, जिसमें पीले रंग का विशेष महत्व है—जैसे पीले वस्त्र, पीला प्रसाद और पीली पूजन सामग्री। मंदिर की मुख्य विशेषता इसकी प्राचीनता और वह दिव्य ऊर्जा है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहाँ की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती। यहाँ का मुख मंडल उत्तर की ओर है और देवी माँ यहाँ त्रिशक्ति (लक्ष्मी, सरस्वती और काली) के संगम के रूप में पूजी जाती हैं।